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विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम: ग्रामीण आजीविका, जल-सुरक्षा और कृषि सशक्तिकरण की नई आधारशिला
डॉ नयन प्रकाश गांधी ,युवा मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अर्थात विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम, 2025, भारत की ग्रामीण विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में सामने आया है। 10 फरवरी 2026 को संसद में दी गई जानकारी के अनुसार यह अधिनियम प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हों, एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 125 दिनों का गारंटीकृत मजदूरी रोजगार सुनिश्चित करता है। यह प्रावधान पूर्व व्यवस्था की 100 दिन की सीमा से आगे बढ़ते हुए ग्रामीण आजीविका सुरक्षा को अधिक सुदृढ़ बनाता है।यह परिवर्तन केवल दिनों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है; यह ग्रामीण रोजगार को एक व्यापक विकास ढांचे से जोड़ने का प्रयास है। अधिनियम में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो श्रमिक को अनिवार्य बेरोजगारी भत्ता देने का कानूनी प्रावधान रहेगा। इससे रोजगार और आजीविका सुरक्षा को संवैधानिक संरक्षण की भावना के साथ जोड़ा गया है।
रोजगार से आगे—ग्रामीण विकास का समग्र मॉडल
विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल मजदूरी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि ग्रामीण पुनरुत्थान का बहुआयामी ढांचा प्रस्तुत करता है। इसमें चार प्रमुख विषयगत क्षेत्र—जल सुरक्षा, मूलभूत ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संबंधी गतिविधियाँ और चरम मौसम की घटनाओं के शमन से जुड़े कार्य—स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं।
जल सुरक्षा को प्राथमिकता देना इस अधिनियम की दूरदर्शिता को दर्शाता है। तालाब, बांध, कृषि तालाब, नहरें, भूजल पुनर्भरण संरचनाएँ और सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियाँ जैसे कार्य केवल रोजगार नहीं देते, बल्कि कृषि की स्थिरता और उत्पादकता को भी बढ़ाते हैं। भारत जैसे मानसून-निर्भर देश में जल संरक्षण दीर्घकालिक खाद्य सुरक्षा की कुंजी है।
कृषि को प्रत्यक्ष समर्थन
अधिनियम यह स्वीकार करता है कि कृषि केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है; श्रम उपलब्धता, भंडारण और विपणन भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। बुवाई और कटाई के समय किसानों को श्रम की कमी का सामना करना पड़ता है। इस समस्या के समाधान हेतु राज्यों को वर्ष में 60 दिनों तक कार्यक्रम के कार्य स्थगित करने का अधिकार दिया गया है, ताकि श्रम कृषि कार्यों में उपलब्ध हो सके। यह प्रावधान कृषि समुदाय के लिए व्यावहारिक राहत प्रदान करता है।
इसके अतिरिक्त, खेत-स्तरीय भंडारण, गोदाम, ग्रामीण हाट और शीत भंडारण जैसी संरचनाओं को अनुमत कार्यों में शामिल करना किसानों को मजबूरी में फसल बेचने से बचाने में सहायक होगा। इससे उन्हें बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलेगा और आय में स्थिरता आएगी।
जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन
आज ग्रामीण भारत जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से जूझ रहा है—अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और तापमान में वृद्धि। अधिनियम में बाढ़ नियंत्रण, तटबंध निर्माण, जल संरक्षण, आपदा आश्रय और पुनर्निर्माण कार्यों को शामिल करना एक सराहनीय पहल है। यह दृष्टिकोण केवल तात्कालिक राहत नहीं, बल्कि दीर्घकालिक लचीलापन (resilience) निर्माण की दिशा में कदम है।
विविध आजीविका के अवसर
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए कृषि से जुड़े विविध आय स्रोतों को बढ़ावा देना आवश्यक है। अधिनियम में पशुपालन, मत्स्य पालन, वर्मी-कंपोस्टिंग, नर्सरी, बागवानी और मूल्यवर्धन गतिविधियों को शामिल करना इसी सोच का परिणाम है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय के कई स्रोत बनेंगे, पलायन कम होगा और स्थानीय रोजगार सृजन को बल मिलेगा।
राज्यों की भूमिका और क्रियान्वयन की चुनौती
केंद्र सरकार द्वारा ढांचा तैयार किए जाने के बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपनी योजनाएँ अधिसूचित कर कार्यान्वयन शुरू करना होगा। यहीं से इस अधिनियम की वास्तविक परीक्षा आरंभ होती है। पारदर्शिता, तकनीकी मॉनिटरिंग, सामाजिक लेखा-जोखा और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजना निर्माण अनिवार्य होंगे।
राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि 125 दिन की रोजगार गारंटी केवल आंकड़ों में न रहे, बल्कि समय पर भुगतान, गुणवत्तापूर्ण परिसंपत्तियों का निर्माण और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वास्तविक परिवर्तन लाए। पंचायत स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म और जियो-टैगिंग जैसी तकनीकों का उपयोग प्रभावशीलता बढ़ा सकता है।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यदि यह अधिनियम प्रभावी रूप से लागू होता है, तो इसके व्यापक सामाजिक और आर्थिक परिणाम होंगे। ग्रामीण उपभोग में वृद्धि से स्थानीय बाजार सशक्त होंगे। जल संरचनाओं और अवसंरचना के निर्माण से कृषि उत्पादकता बढ़ेगी। विविध आजीविका गतिविधियाँ ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को नए अवसर प्रदान करेंगी।
125 दिनों की रोजगार गारंटी का अर्थ है कि ग्रामीण परिवारों को आय का एक अपेक्षाकृत स्थिर स्रोत मिलेगा, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। दीर्घकाल में यह गरीबी उन्मूलन और सामाजिक समानता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
नीति की सफलता के लिए आवश्यक कदम
पारदर्शी कार्यान्वयन: समय पर भुगतान और सामाजिक ऑडिट की मजबूती।
स्थानीय योजना निर्माण: ग्राम पंचायत स्तर पर जरूरतों का वैज्ञानिक आकलन।
तकनीकी समावेशन: जियो-टैगिंग, डिजिटल मॉनिटरिंग और डेटा एनालिटिक्स।
कौशल विकास से जोड़ना: अकुशल श्रम के साथ-साथ कौशल उन्नयन के अवसर।
जल और कृषि समन्वय: दीर्घकालिक परिसंपत्तियों पर विशेष ध्यान।

रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Dr. Rajesh Kumar